इंडियन एजुकेशन सिस्टम | Indian Education System



जितना स्विट्जरलैंड का पूरा जनसंख्या है उतना भारत इंजीनियर्स पैदा करता है। उसके बाद भी रीसर्च एंड इन्नोवेशन में स्विट्जरलैंड टॉप पर है।
Student facing educational pressure
Source: indianfolk.com


ASER (Annual Status of Education Report) की रिपोर्ट के हिसाब से 83% भारत के एजुकेटेड लोग एंप्लोयाबल ही नहीं हैं। सुन्दर पिचाई , सत्य नाडेला इन लोगों ने भी अपनी आगे की पढ़ाई विदेशों में पूरी की है।


http://img.asercentre.org/docs/Home/Homepage/transitionsbetweenhomepreprimaryandprimaryeducationinruralindia.pdf
ASER 2017



इंडियन एजुकेशन सिस्टम को बेहतर कैसे समझें?


इसका जवाब जानने के लिए हमें थोड़ा भूत काल में जाना पड़ेगा अर्थात थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा। जब भारत पर ब्रिटिशर्स का शासन चल रहा था तो ईस्ट इंडिया कंपनी के सामने दो अहम चुनौतियां थी। एक "communication with Indian" और दूसरा "Workers" की बहुत जरूरत थी उन्हें। Thomas Babington Macaulay ने हमें English Education Act of 1835 दिया, जिससे उनके दोनों जरूरतें पूरी हो गई।

पहला, उन्हें बंदे चाहिए थे ताकि वो चुप चाप बेंच पर बैठे और उनके लिए काम करे, सवाल ना करे साथ ही में वो ज्यादा क्रिएटिव ना हो।

दूसरा, कम्युनिकेशन इन इंग्लिश, इंग्लिश सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा नहीं है उसके बाद भी भारत में इंग्लिश एक भाषा की तरह एक क्लास बन गया। इंग्लिश को ले कर रूस, चीन तथा फ्रांस ये सब जगह इतना मनोग्रस्‍तता नहीं है जितना भारत में है।

भारत में, अगर आपकी इंग्लिश अच्छी नहीं है, तो poor communication बोला जाता है। जबकि इंगलिश नहीं आने का मतलब यह है कि आपको कोई दूसरी भाषा आती है।

भारत में 5 साल पुराना बना IAS भी आज के इस डेट में आउटडेटेड माना जाता है। लेकिन हमारी एजुकेशन सिस्टम (शिक्षण प्रणाली) सिर्फ थोड़े से बदलाव के साथ आज भी ऐसे ही चल रहा है। हमे एजुकेशन सिस्टम में केवल एक कॉम्पटीशन होता है जो जितना ज्यादा रटेगा उसको उतना ज्यादा मार्क्स मिलेगा

अब, जिसके संस्कृति में 95 आए हैं वो भी संस्कृति नहीं बोल पा रहा है। History के नाम पर इतनी मोटी मोटी किताबे हैं जिसका कोई मतलब नहीं है। आज के तारीख में आपको कुछ भी पता करना हो तो आप गूगल से पता कर लोगे। उसके बाद आपको इतना कुछ याद रखने की जरूरत नहीं है। Government School में हर क्लास में एक इंगलिश की एक बुक है, 12-12 साल लगाने के बाद भी इंगलिश नहीं बोल पा रहे है। और विदेशों मै बिना किसी बुक को हाथ लगाए 5 साल का बच्चा सीख लेता है। ऐसा क्यूं?

क्यूंकि उसको ऐसा एन्वाइरन्मेंट मिल जाता है।

आप सब को (a+b)² तो याद ही होगा हमने रटा जो है। इसका वास्तविक जीवन में क्या काम है ये किसी को नहीं पता। बस पढ़ने को बोल दिया जा रहा है। हो सकता है इसका मतलब हो लेकिन आप प्रयास कर के देखिए, किसी को नहीं पता है।

हां, यदि आपने कुछ उल्टा बोल दिया तो चार हसने वाले लोग जरुर मिल जाएंगे।


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इंडियन एजुकेशन सिस्टम कैसी होनी चाहिए?

किंडरगार्टन के बच्चो को सीखने के लिए जो तरीके होती हैं वो लाख गुना बेहतर है कॉलेज की वो रटने वाले तकनीक से। और जिन बच्चों को बहुत ज्यादा नंबर आतें है न जो वो एग्जाम में छुपा छुपा के लिखते है। (आपके क्लास में ऐसा कौन था उसका नाम कमेंट करें) आप देखोगे कि जब वो रियल लाइफ में आते है तो ज्यादातर परेशान होते हैं। सब लोगों का एक जैसा सिलेबस एक जैसा अटेंशन और सेम चीज सिखाई जाती है, बिना उसके capability देखे और क्रिएटिविटी का दूर दूर तक कोई मतलब नहीं दिखाई देता।

अब एक लाइन से आप शेर, मछली, सांप, और हाथी सब को खड़ा कर दो। और उनको बोलो कि सामने पेड़ पर चढ़ के दिखाओ। उनको तो जिंदगी भर यही लगेगा कि वो किसी काबिल ही नहीं हैं।
और महाभारत में द्रोणाचार्य ने पांडवों को उनके स्किल के हिसाब से उनको चीजें सिखाई, सबको एक ही विध्या नहीं सिखाई।

हमारे एजुकेशन सिस्टम में ज्यादा कुछ ऑप्शन्स नहीं है। सबसे ऊपर साइंस, कॉमर्स, और सबसे अंत में आर्ट्स। आर्ट्स लेने वाले लोग को तो इतना हल्के में लेते हैं जैसे वो किसी काम के है नहीं। हर मां- बाप को तो आज डॉक्टर या इंजिनियर ही बनाना चाहते हैं। कॉलेज वाले कुछ एक्सट्रा विषय जोड़ भी देते हैं तो मां बाप बोलेंगे कि एंट्री ही नहीं कराएंगे। तो सारा पैसा बर्बाद होगा कॉलेज का। ऐसे में ऑप्शन्स कहां से आएगा?

बचपन से ही आपकी ट्रेनिंग स्टार्ट हो जाती है। मां, बाप, भाई, बहन, रिश्तेदार सब यही समझते हैं कि आपके मार्क्स अच्छे नहीं आएंगे तो आपकी अच्छी जॉब नहीं मिली, तो आपकी जिंदगी बेकार है।

आप अपने लाइफ की क्रिएटिविटी को साइड रखते हो और ये अच्छे मार्क्स और अच्छी जॉब पना आपका सपना बन जाता है। और जब ये सपना पूरा हो जाता है तो आप दूसरों को इर्ष्या फील करवाओगे, नीचा महसूस करवाओगे। और यही ये सपना टूट जाता है तो सेल्फ डाउट में आ जाओगे, बाहर वाले आपको उतना नीचा नहीं समझेंगे जितना आप अपने खुद के नज़रों में गिर जाओगे।





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आप किसी भी 4-5 सफल व्यक्ति के बारे में पढ़ो जिन्हें आप बहुत सफल मानते हो या जिनके तरह आप अपनी लाइफ जीना चाहते हो। मै यह दावे के साथ कह सकता हूं वो इस तरह के सिक्षण प्रणाली से कभी सक्सेस नहीं हुए होंगे। धीरूभाई अंबानी, विराट कोहली, आमिर खान, नरेंद्र मोदी ये सब हमारे current education system के ट्रैक में नहीं फसे। इन्होंने खुद सीखा, खुद एजुकेट हुए और खुद आगे बढ़े। किसी कंपनी के CEO ko यदि यह बोला जाए कि अपने कंपनी के सारे डिपार्टमेंट इंटरव्यू दीजिए तो कोई गारंटी नहीं है कि वो सारे डिपार्टमेंट का इंटरव्यू निकाल लेगा। और ये भी संभव है कि वो आधे से ज्यादा डिपार्टमेंट के लिए क्वालीफाई ही ना करे।

लेकिन वो पूरी कंपनी चला सकता है। ये को स्किल है इसके बारे ने क्यूं बात नहीं होती। लोग अपने 25% से ज्यादा जिंदगी इस current education system में लगा देते हैं। ताकि आपने से काम पढ़े लिखे आदमी के कंपनी में जा के उसके लिए काम कर सके। इंडिया की करेंट एजुकेशन सिस्टम अगर इतना अच्छा है तो जो भी सेलिब्रिटीज हैं, जो पॉलिटीशियन लोग है, अपने बच्चे को विदेशों में पढ़ने को क्यू भेजते हैं


समाधान


पॉलिटीशियन, जिन्हें इस देश को उन्नति पर ले जाना चाहिए। वो अपने बच्चे को विदेश ले जा रहे हैं। ये क्या बात हुई? इसका एक समाधान यह हो सकता है कि पॉलिटीशियन जिस एरिया से वो जीते हों उसी एरिया के Government College में उनके बच्चे को पढ़ना कंपल्सरी हो जाए। तभी वहां की गवर्नमेंट कॉलेज सुधार सकती है।







368 सरकारी चपरासी के सीट के लिए 1.5 लाख ग्रेजुएट 24,968 पोस्ट ग्रेजुएट ने apply किया। कई लोग 5-5/6-6 साल से सरकारी नौकरी के लिए त्यारी कर रहे है। उनसे पूछिए कि वो क्यूं इतना समय गवा रहे हैं तो वो यही बोलेंगे की जॉब सेक्योर है, काम नहीं भी करेंगे तो निकला नहीं जाएगा। ये सारे कामचोरी वाली बातें माइंड में इसी लिए आती हैं क्यूंकि जो हमारे भारत का एजुकेशन सिस्टम है वो इतना कॉन्फिडेंस ही नहीं देता है कि हम अपने स्किल के दम पर काम करें और हम निकालने का डर ना हो। अगर मै आगे आने वाले 5 साल की बात करूं तो जो technology के आने वाला है उससे इतना ज्यादा बदलाव आ जाएगा कि जो आज हम पढ़ रहे हैं पता नहीं उस समय वो रेलेवेंट होगी भी या नहीं।

यह आर्टिकल पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद।